महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) ने अपनी वस्तुनिष्ठ (MCQ) परीक्षाओं की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, न्यायपूर्ण और त्रुटिरहित बनाने के लिए कुछ ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है। ये सभी परिवर्तन 1 मार्च 2026 से आयोजित होने वाली सभी परीक्षाओं पर लागू होंगे। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य उम्मीदवारों के लिए प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता लाना और मूल्यांकन को पूरी तरह निष्पक्ष बनाना है।
मुख्य बदलावों का सारांश
नई प्रणाली में कई आधारभूत परिवर्तन शामिल हैं, जिन्हें इस तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:
| परिवर्तन का क्षेत्र | नया प्रावधान | उद्देश्य / प्रभाव |
|---|---|---|
| उत्तरपत्रिका का स्वरूप | अब यह कार्बनलेस दो प्रतियों में होगी। एक प्रत MPSC के पास जाएगी, दूसरी उम्मीदवार के पास रहेगी। | पारदर्शिता बढ़ाना; उम्मीदवार के पास अपने उत्तरों का सबूत रहेगा। |
| उत्तर के विकल्प | प्रत्येक प्रश्न के लिए चार उत्तर विकल्पों के अलावा एक पांचवां विकल्प होगा। | उम्मीदवार को किसी प्रश्न को स्पष्ट रूप से छोड़ने का औपचारिक विकल्प देना। |
| नकारात्मक अंकन नियम | गलत उत्तर, एक से अधिक विकल्प भरने या उत्तर बदलने पर प्रश्न के पूर्ण अंक का 25% (1/4 अंक) काटे जाएंगे। | अनुमान लगाकर उत्तर भरने की प्रवृत्ति को रोकना और सटीकता को प्रोत्साहित करना। |
| उत्तरपत्रिका अमान्य होने के कारण | गलत पेन का उपयोग, अनुचित निशान लगाना, आवश्यक विवरण/हस्ताक्षर न भरना आदि। | मूल्यांकन प्रक्रिया की अखंडता और गंभीरता सुनिश्चित करना। |
| बैठक क्रमांक | अब यह 7 अंकों का एक स्थायी नंबर होगा जो पूरी चयन प्रक्रिया में उम्मीदवार के साथ रहेगा। | पहचान प्रक्रिया को सरल और त्रुटि-मुक्त बनाना। |
नई उत्तरपत्रिका: दोहरी प्रतिलिपि और संरचना
सबसे बड़ा बदलाव उत्तरपत्रिका के स्वरूप में आया है। अब उम्मीदवारों को दो प्रतियों वाली कार्बनलेस उत्तरपत्रिका मिलेगी। परीक्षा समाप्ति पर:
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मूल प्रति आयोग के पास मूल्यांकन के लिए जमा होगी।
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दूसरी प्रति (ड्यूप्लिकेट कॉपी) तुरंत उम्मीदवार को सौंप दी जाएगी।
इसके अलावा, उत्तरपत्रिका को दो भागों में बांटा गया है:
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भाग-1: केवल उत्तरों को चिह्नित (शेड) करने के लिए।
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भाग-2: इसमें उम्मीदवार को परीक्षा का नाम, अपना 7-अंकीय स्थायी बैठक क्रमांक, प्रश्नपत्रिका क्रमांक और अपने तथा परीक्षा निरीक्षक के हस्ताक्षर अनिवार्य रूप से भरने होंगे। इनमें से किसी की भी कमी उत्तरपत्रिका को अमान्य कर सकती है।
पांचवा विकल्प और कड़े मूल्यांकन नियम
पारंपरिक चार विकल्पों के साथ, अब हर प्रश्न में एक पांचवा विकल्प भी होगा। यदि उम्मीदवार किसी प्रश्न का उत्तर नहीं देना चाहता, तो उसे अनिवार्य रूप से इस पांचवे विकल्प को चुनना होगा। यदि कोई प्रश्न खाली छोड़ दिया जाता है (कोई विकल्प नहीं चुना जाता), तो भी उस प्रश्न के कुल अंक का 25% अंक काट लिया जाएगा।
नकारात्मक अंकन के नियम अब और सख्त हुए हैं। निम्नलिखित स्थितियों में प्रत्येक प्रश्न के 1/4 अंक (25%) काटे जाएंगे:
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एक से अधिक विकल्प चिह्नित करना।
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दिए गए उत्तर को काट-छांटकर बदलना।
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गलत उत्तर देना।
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पांचवा विकल्प न चुनकर प्रश्न को पूरी तरह खाली छोड़ देना।
उम्मीदवारों के लिए स्पष्ट सलाह
इन बदलावों के मद्देनजर, MPSC की तैयारी कर रहे सभी उम्मीदवारों को यह सलाह दी जाती है:
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आयोग द्वारा जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों और नमूना उत्तरपत्रिका को ध्यान से पढ़ें।
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केवल निर्धारित काली/नीली बॉल पॉइंट पेन का ही उपयोग करें।
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उत्तरपत्रिका के दूसरे भाग में सभी जानकारी सावधानीपूर्वक और स्पष्टता से भरें तथा हस्ताक्षर अवश्य करें।
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परीक्षा की रणनीति में अनुमान लगाने के बजाय, केवल उन्हीं प्रश्नों के उत्तर दें जिनके बारे में आप निश्चित हों। अनिश्चित प्रश्नों के लिए पांचवे विकल्प का सहारा लेना बेहतर होगा।
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परीक्षा से पहले, नए प्रारूप का अभ्यास अवश्य कर लें।
निष्कर्ष:
MPSC का यह कदम राज्यस्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में एक नए मानक की स्थापना करता है। ये सुधार न सिर्फ मूल्यांकन को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाएंगे, बल्कि उम्मीदवारों को भी एक स्पष्ट और संरचित प्रक्रिया प्रदान करेंगे। 1 मार्च 2026 के बाद परीक्षा देने वाले सभी अभ्यर्थियों को इन नियमों की गहन जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है।
