चुनाव आयोग ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल, राजस्थान और पुडुचेरी में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है। इस प्रक्रिया में सबसे अधिक 58.20 लाख नाम पश्चिम बंगाल से काटे गए हैं। राजस्थान से 41.85 लाख और पुडुचेरी से लगभग 85 हजार मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं।
राज्यवार ब्योरा: कितने नाम हटे?
-
पश्चिम बंगाल: राज्य से कुल 58,20,898 मतदाताओं के नाम हटाने का प्रस्ताव है। यह संख्या तीनों राज्यों में सर्वाधिक है।
-
राजस्थान: यहाँ 41.85 लाख मतदाताओं को ड्राफ्ट सूची से हटाया गया है। निर्वाचन विभाग ने अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट मतदाताओं की एक अलग सूची भी जारी की है।
-
पुडुचेरी: केंद्रशासित प्रदेश में 85 हजार नाम काटे गए हैं और 110 नए मतदान केंद्र जोड़े गए हैं। संशोधन के बाद यहाँ कुल मतदाताओं की संख्या 7.64 लाख दर्ज की गई है।
SIR प्रक्रिया क्या है और आगे क्या होगा?
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) एक विस्तृत प्रक्रिया है जिसमें घर-घर जाकर मतदाता सूची को सत्यापित और अद्यतन किया जाता है। देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया 28 अक्टूबर से चल रही है। अब घर-घर सत्यापन का काम पूरा हो गया है और दावे, आपत्तियों और सुनवाई का चरण शुरू होगा।
इसका दूसरा चरण फरवरी 2026 तक चलेगा और अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी, 2026 को जारी की जाएगी। गोवा और लक्षद्वीप में भी आज ड्राफ्ट सूची प्रकाशित की जानी है।
नाम सूची से हटने पर मतदाता क्या करें?
चुनाव आयोग ने सभी मतदाताओं से अपना नाम ऑनलाइन जांचने की अपील की है। अगर किसी का नाम ड्राफ्ट सूची से हट गया है, तो फॉर्म-6 भरकर नाम फिर से जुड़वाया जा सकता है।
-
फॉर्म कैसे और कहाँ मिलेगा?: फॉर्म-6 बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), तहसील, एसडीएम कार्यालय या चुनाव आयोग की वेबसाइट से प्राप्त किया जा सकता है।
-
कौन से दस्तावेज?: फॉर्म के साथ पहचान (आधार, पैन), पते का प्रमाण (बिजली बिल, बैंक पासबुक) और उम्र का प्रमाण (जन्म प्रमाण पत्र, मार्कशीट) जमा करना होगा।
-
आगे की प्रक्रिया: फॉर्म जमा करने के बाद BLO सत्यापन के लिए घर आएगा। सभी जानकारी सही पाए जाने पर नाम अंतिम सूची में जोड़ दिया जाएगा।
विस्तारित समयसीमा और राजनीतिक प्रतिक्रिया
चुनाव आयोग ने कुछ राज्यों में एसआईआर के लिए समयसीमा बढ़ा दी है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अंडमान-निकोबार में अब फॉर्म 18 दिसंबर तक भरे जा सकेंगे। उत्तर प्रदेश के लिए यह तिथि 26 दिसंबर निर्धारित की गई है।
वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया की आलोचना करते हुए इसे “खतरनाक” बताया है और मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर इसे रोकने की मांग की है।
